सीमा पे खड़े हैं जो
चौड़ी छाती तान के
किस मुख से
बखान करूँ
मैं उनका
ये तो गौरव हैं
मेरे हिन्दूस्तान के
रात-दिन
दुश्मनों से
लेते हैं टक्कर
प्राणों की अपने
परवाह न करते
जान भी
देना पड़े तो
देते हैं बड़ी शान से
ये तो गौरव हैं
मेरे हिन्दूस्तान के
छुड़ा के छक्के
दुश्मनों के
शहीद हो गए
जवान जो अपने
शब्द भी पड़ गए हैं कम
क्या गाऊँ गाथा
मैं उनके बलिदान के
ये तो गौरव हैं
मेरे हिन्दूस्तान के,
ये तो गौरव हैं
मेरे हिन्दूस्तान के
-विभा तिवारी