आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गौरव हिन्दूस्तान के

                
                                                         
                            सीमा पे खड़े हैं जो
                                                                 
                            
चौड़ी छाती तान के
किस मुख से
बखान करूँ
मैं उनका
ये तो गौरव हैं
मेरे हिन्दूस्तान के

रात-दिन
दुश्मनों से
लेते हैं टक्कर
प्राणों की अपने
परवाह न करते
जान भी
देना पड़े तो
देते हैं बड़ी शान से
ये तो गौरव हैं
मेरे हिन्दूस्तान के

छुड़ा के छक्के
दुश्मनों के
शहीद हो गए
जवान जो अपने
शब्द भी पड़ गए हैं कम
क्या गाऊँ गाथा
मैं उनके बलिदान के
ये तो गौरव हैं
मेरे हिन्दूस्तान के,
ये तो गौरव हैं
मेरे हिन्दूस्तान के
-विभा तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर