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पता है

Varun Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पता है…
        
                                                    
                            
आगे वो मेरे साथ नहीं रहेगी,
फिर भी, न जाने क्यों…
उसकी हर छोटी-बड़ी बात की फिक्र आज भी है मुझे।

सोचता हूँ…
उसके साथ रह लूँ,
या यूँ कहूँ…
बस तब तक रहूँ,
जब तक वो मेरी ज़िंदगी में है।

मालूम है…
एक दिन ये सफर रुक जाएगा,
वो किसी और राह पर चली जाएगी,
पर कौन समझाए…
वो तो बस यही चाहता है,
कि उसके जाने से पहले,
मैं उसके हर पल का हिस्सा बन जाऊँ।

उसकी चुप्पियों को समझना,
उसकी थकान में भी उसका हाथ थामना,

कभी हँसी में छुपे उसके दर्द सुन लूँ,
कभी उसकी चुप्पी के मतलब पढ़ लूँ,
और कभी… बस उसके पास बैठकर
उसकी आँखों में अपना घर ढूँढ लूँ।

शायद…
यही  है —
मंज़िल की नहीं,
बस उसके साथ चलने की चाह है…
जब तक वो है।

 
एक वर्ष पहले
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