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पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि...

Varnika Arya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या बीती होगी उस माँ पर, लाल जिसका चला गया
        
                                                    
                            
खून से अपने देश का, क़र्ज़ जो चुका गया
टूट गई है पिता की लाठी, माँ का आँचल वीरान हुआ
हिम्मत चली गयी छोटो की, प्यार बड़ों का चला गया
टूट गई है राखी बहन की, स्नेह उसका चला गया
टूट गई है चूड़ी, उन मेहंदी वाले हाथोंं की
सिन्दूर, मंगलसूत्र, पायल, बिछिया सब चला गया
हिफाज़त चली गयी बेटी की,बेटे की राहें गुमनाम हुई
कोई छोड़ गया है अपने दो साल के प्यारे को
कोई छोड़ गया है अपने दो साल के नन्हे को
कोई बिना देखें ही चल बसा दो महीने के लल्ला को
टूट रहे हैं दरो दीवारे सुनकर चीखे अपनो की
उजाले लेकर घर के सारे जाने कहाँ वो चला गया
घर का कोना कोना चुप है, आवाज़े सब चली गयी
छूट गई है ऊन सिलाई , कंपकंपाते हाथोंं से
खबर आयी जब चलें जाने की, दूर कहीं पहाड़ों से
टूट गए अब सपने सारे , नींदें सबकी नीलाम हुई
चला गया वो कहाँ यहाँ से, बस यही चीत्कार हुई
चला गया वो कहाँ यहाँ से, बस यही चीत्कार हुई...

- वर्णिका आर्य
2 वर्ष पहले
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