विज्ञापन

प्यासा के ग़ज़ल

विजय कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुहब्बत में थे माहिर हम, साहिल ना मिला हमको।
        
                                                    
                            
समझता कोई ना किस्सा,बताते रह गये हम तो।

लगीं दुनिया हमे झूठी,ये डूबेगी बहुत जल्दी,
यहां कोई न सुनता है, चिल्लाते रह गए हम तो।

सफीना इक-पे-इक डूबी,कदम क्या लड़खड़ाये थे,
दिलों दिल ही में खुद को, रुलाते रह गए हमतो ।
--'प्यासा'
 
19 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile

Ankit Kumar

10489 कविताएं

View Profile