मुहब्बत में थे माहिर हम, साहिल ना मिला हमको।
समझता कोई ना किस्सा,बताते रह गये हम तो।
लगीं दुनिया हमे झूठी,ये डूबेगी बहुत जल्दी,
यहां कोई न सुनता है, चिल्लाते रह गए हम तो।
सफीना इक-पे-इक डूबी,कदम क्या लड़खड़ाये थे,
दिलों दिल ही में खुद को, रुलाते रह गए हमतो ।
--'प्यासा'
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