हमरो बा भोजपुरी कविता।
मसि-कागद से बा कुछ रिश्ता।
दोहा मुक्तक रोज लिखी ले,
सांच बात हम खोज लिखी ले।
विषय बने ला सागर सविता।
हमरो बा भोजपुरी कविता।
कजरी सरसी दोहा गाईं ।
मिले केहू त रोज सुनाईं।
मजा एहि में खूब मिलेला।
मनवा बनि के फूल खिलेला।
लिखीं भूत आ लिखीं भविता।
हमरो बा भोजपुरी कविता।
जलन - दर्द बा बहुते जग में
पग-पग संकट बहुते मग में।
सगरी दूख भगावे वाला ।
मन के सुख पहुँचावे वाला।
कुछ समिधा कुछ अइसन हविषा।
हमरो बा भोजपुरी कविता।
-विजय कुमार पाण्डेय 'प्यासा'