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हमरो बा भोजपुरी कविता

                
                                                         
                            हमरो बा भोजपुरी कविता।
                                                                 
                            
मसि-कागद से बा कुछ रिश्ता।
दोहा मुक्तक रोज लिखी ले,
सांच बात हम खोज लिखी ले।
विषय बने ला सागर सविता।
हमरो बा भोजपुरी कविता।

कजरी सरसी दोहा गाईं ।
मिले केहू त रोज सुनाईं।
मजा एहि में खूब मिलेला।
मनवा बनि के फूल खिलेला।
लिखीं भूत आ लिखीं भविता।
हमरो बा भोजपुरी कविता।

जलन - दर्द बा बहुते जग में
पग-पग संकट बहुते मग में।
सगरी दूख भगावे वाला ।
मन के सुख पहुँचावे वाला।
कुछ समिधा कुछ अइसन हविषा।
हमरो बा भोजपुरी कविता।

-विजय कुमार पाण्डेय 'प्यासा'
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46 मिनट पहले

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