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रण जीवन हा लड़ के समझीं।

विजय कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            डर में न रहीं डर दूर रखीं।
        
                                                    
                            
हिय साहस से भरपूर रखीं।
तन के मन के मजबूत रखीं।
बल ज्ञान सदा भरपूर रखीं।
नित चाल विनम्र सहूर रखी।
डर में न रहीं डर दूर रखीं।

कर जोड़ रहीं विनयी बन के।
सद पूत बनी घर के अपने।
पढ़ के लिख के निज राह गढ़ीं।
कर दूर चलीं दुविधा मन के ।
अइसे मन मे कुछ लूर रखीं ।
डर में न रहीं डर दूर रखीं।

पल से कर प्यार चले जन जे।
पल धार बुझे समझे पल के।
पल के उपयोग सदा यश दे।
सुधि लोग कहे महिमा पल के।
पल ध्यान सदा भरपूर रखीं।
डर में न रहीं डर दूर रखीं।

रण जीवन हा लड़ के समझीं।
दम बा त सुनीं पड़ के समझीं।
गिरि हा इह पे चढ़ के समझीं।
पथ जीवन के गड़ के समझीं।
जगमें खुद के मशहूर रखीं।
डर में न रहीं डर दूर रखीं।
हिय साहस से भरपूर रखीं।

-विजय कुमार पाण्डेय 'प्यासा'
2 घंटे पहले
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