मर्द नहीं चिल्लाते किसी पीड़ा में पड़ जाने से,
मर्द चिल्लाते हैं खाने में नमक बढ़ जाने से।
मर्द नहीं चिल्लाते अपनी प्रेमिका के झुंझलाने से,
मर्द चिल्लाते हैं अपनी बहन के प्रेम-संबंध बन जाने से।
मर्द नहीं चिल्लाते किसी ग़रीब के पिट जाने से,
मर्द चिल्लाते हैं किसी लड़की की जाँघ दिख जाने से।
मर्दों ने जब भी चिल्लाया है,
या तो अपने से छोटों पर,
या फिर औरतों पर।
चिल्ला देने से शायद बात सच हो जाती है,
या उन बातों से जुड़ जाते हैं
उनके सच होने के प्रमाण।
मर्द जब चिल्ला के थक गए,
थक के घर लौटे,
तो शांति पाए किसी औरत की बाँहों में।