कल देखा मैंने हनुमान अंश है
ये फिल्म नहीं, एक अनुभव है
स्वयं को आईने में देखने का प्रयत्न है
नहीं कुछ अपना जीवनपर्यन्त है
उस घटित पल का जैसे मैं हिस्सा हूं
कभी भावुक कभी मस्ती कभी भक्ति,
तो कभी पीड़ा में ओतप्रोत हूं
समझ नहीं आया कि ये चलचित्र है या
उस चलचित्र में एक चित्र मैं ख़ुद भी हूँ!
.