मैं अपने पूरे होश हवास में
अपनी वसीयत करता हूँ
मैं ह्रदय रोग से पीड़ित हूँ
आज वसीयत करता हूँ ।।
जब मैं मर जाऊं तो
मेरा कमरा खुलवाना
उसमे रक्खी मेरी वसीयत
उसको सबको पढ़वाना ।।
जो मेरे पुरखों की धन दौलत थी
वो सब मेरे बच्चों ने पहले ही ले ली है
अब जो कुछ बचा मेरे हाथो में
अब विद्वानों को वसीयत कर दी है ।।
मुझे नहीं जलाना मरघट मे
जल कर मुझको राख न करना
ये देह मेरी बच्चों के पढ़ने की खातिर
मेडिकल काॅलेज को दे देना ।।
मेरी रचना मेरी कहानी
कवियों को सादर अर्पित कर देना
मिले हुए मेरे सम्मानों को
मेरी अर्थी पर रख देना ।।
नहीं पता मैं कब मर जाऊं
इसलिए वसीयत करता हूँ
मैं हृदय रोग से पीड़ित हूँ
आज वसीयत करता हूँ ।।
उत्तम कुमार तिवारी " उत्तम "
लखनऊ
उत्तर प्रदेश
भारत