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मातृभूमि प्रेम

Usha Chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस मिट्टी से मैं पैदा हुआ,
        
                                                    
                            
इस मिट्टी में खेलकर मैं बड़ा हुआ ।
इस मिट्टी से ही है मेरी पहचान,
क्योंकि मैं हूं इस मिट्टी की संतान।।

ना जाने कितने आए, कितने चले गए,
इस मातृभूमि के प्यार से रह गए अनजान ।
कुछ को यह मातृभूमि समझ नहीं आई ,
कुछ को यह मातृभूमि छोड़ नहीं पाई।।

घर से दूर रहने को था मैं मजबूर ,
क्योंकि मातृभूमि की रक्षा करना ही था मेरा नूर ।
फिर क्या मैं अपनी दास्तां खुद सुनाऊं ,क्या बतलाऊं, अब मैं तुम्हें यारों क्या दिखाऊं,
मैं मिल जाता हूं कभी श्मशान में ,तो कभी कब्रिस्तान में,
क्योंकि मैं हूं इस मातृभूमि का एक शहीद वीर जवान।।


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7 वर्ष पहले
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