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दो लाइन शायरी

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मां तेरा साथ जो मिल जाएगा चलने के लिए
        
                                                    
                            
तू बस एक बार ही आज मुझे मिलने के लिए

तुम्हे खोने नहीं दूंगा ये मेरा दिल से वादा है
यहां हर चीज़ की क़ीमत तेरी एक जां से ज़्यादा है

चाहे थोड़ा ही सही वक़्त निकाला करिए
अपने बहके हुए क़दमों को संभाला करिए

तेरी यादों में घुट घुट कर के रोना चाहता हूं में
लिटा ले मां तू गोदी में के सोना चाहता हूं में

तेरी यादों में मुद्दत से भला में सो नहीं पाया
सभी का हो गया हूं पर में तेरा हो नहीं पाया

कौन कहता है के में तन्हा गुज़र जाऊंगा
तुम अगर साथ ना दोगे तो बिखर जाऊंगा

आके मिलना कभी एक दिन मेरी तन्हाई से
मुझको भी लगता है डर अपनी ही परछाई से

-सरताज मंसूरी
2 महीने पहले
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