आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दो लाइन शायरी

                
                                                         
                            मां तेरा साथ जो मिल जाएगा चलने के लिए
                                                                 
                            
तू बस एक बार ही आज मुझे मिलने के लिए

तुम्हे खोने नहीं दूंगा ये मेरा दिल से वादा है
यहां हर चीज़ की क़ीमत तेरी एक जां से ज़्यादा है

चाहे थोड़ा ही सही वक़्त निकाला करिए
अपने बहके हुए क़दमों को संभाला करिए

तेरी यादों में घुट घुट कर के रोना चाहता हूं में
लिटा ले मां तू गोदी में के सोना चाहता हूं में

तेरी यादों में मुद्दत से भला में सो नहीं पाया
सभी का हो गया हूं पर में तेरा हो नहीं पाया

कौन कहता है के में तन्हा गुज़र जाऊंगा
तुम अगर साथ ना दोगे तो बिखर जाऊंगा

आके मिलना कभी एक दिन मेरी तन्हाई से
मुझको भी लगता है डर अपनी ही परछाई से

-सरताज मंसूरी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर