मां तेरा साथ जो मिल जाएगा चलने के लिए
तू बस एक बार ही आज मुझे मिलने के लिए
तुम्हे खोने नहीं दूंगा ये मेरा दिल से वादा है
यहां हर चीज़ की क़ीमत तेरी एक जां से ज़्यादा है
चाहे थोड़ा ही सही वक़्त निकाला करिए
अपने बहके हुए क़दमों को संभाला करिए
तेरी यादों में घुट घुट कर के रोना चाहता हूं में
लिटा ले मां तू गोदी में के सोना चाहता हूं में
तेरी यादों में मुद्दत से भला में सो नहीं पाया
सभी का हो गया हूं पर में तेरा हो नहीं पाया
कौन कहता है के में तन्हा गुज़र जाऊंगा
तुम अगर साथ ना दोगे तो बिखर जाऊंगा
आके मिलना कभी एक दिन मेरी तन्हाई से
मुझको भी लगता है डर अपनी ही परछाई से
-सरताज मंसूरी
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