की मैं धरती ढूंढता हूँ ,
आकाश ढूंढ़ता हूँ ,
मैं दिन ढूंढता हूँ ,
रात ढूंढ़ता हूँ,
मैं अपने पास ढूंढ़ता हूँ ,
मैं अपने साथ ढूंढता हूँ ,
मैं यार ढूंढ़ता हूँ ,
बार - बार ढूंढता हूँ ,
की कोई बतादे मुझे कहा हैं,
मैं वो सुकून के लम्हे चार ढूंढ़ता हूँ।
मैं सब्र से ढूंढता हूँ ,
मैं अब्र मैं ढूंढता हूँ ,
हैं दिल मैं बेचैनी मैं इसका हल ढूंढता हूँ ,
न कुछ सोच पा रहा हूँ
न कुछ समझ पा रहा हूँ ,
न खुद से चाह कर भी लड़ पा रहा हूँ ,
की कोई मिलादो मुझे इस सुकून से न मैं जी पा रहा हूँ न मर पा रहा हूँ।