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सुकून

                
                                                         
                            की मैं धरती ढूंढता हूँ ,
                                                                 
                            
आकाश ढूंढ़ता हूँ ,

मैं दिन ढूंढता हूँ ,
रात ढूंढ़ता हूँ,

मैं अपने पास ढूंढ़ता हूँ ,
मैं अपने साथ ढूंढता हूँ ,
मैं यार ढूंढ़ता हूँ ,
बार - बार ढूंढता हूँ ,

की कोई बतादे मुझे कहा हैं,
मैं वो सुकून के लम्हे चार ढूंढ़ता हूँ।

मैं सब्र से ढूंढता हूँ ,
मैं अब्र मैं ढूंढता हूँ ,

हैं दिल मैं बेचैनी मैं इसका हल ढूंढता हूँ ,
न कुछ सोच पा रहा हूँ
न कुछ समझ पा रहा हूँ ,
न खुद से चाह कर भी लड़ पा रहा हूँ ,

की कोई मिलादो मुझे इस सुकून से न मैं जी पा रहा हूँ न मर पा रहा हूँ।
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2 महीने पहले

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