विज्ञापन

सोलर एनर्जी पर कविता

User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सूरज के रंग अलग है जनाब,
        
                                                    
                            
सूरज ने सोलर एनर्जी को चमकाया,
गाँव हो या शहर या हो खेत खलियान,
हर जगह प्रकाश का परचम है लहाराया,
अंधकार से रोशनदान है बनाया,
जब हाथ हो अपने देश की बेटी पायल का,
तब अंधकार मिनटों में भाग जाता,
अपने देश की माटी से बने हैं, साहब,
हमे अपने देश को सूरज की तरह चमकाना है,
जितना हो सकेगा हमसे उतना उजाला फैलाएंगे।
-आकांक्षा गुप्ता
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all