सूरज के रंग अलग है जनाब,
सूरज ने सोलर एनर्जी को चमकाया,
गाँव हो या शहर या हो खेत खलियान,
हर जगह प्रकाश का परचम है लहाराया,
अंधकार से रोशनदान है बनाया,
जब हाथ हो अपने देश की बेटी पायल का,
तब अंधकार मिनटों में भाग जाता,
अपने देश की माटी से बने हैं, साहब,
हमे अपने देश को सूरज की तरह चमकाना है,
जितना हो सकेगा हमसे उतना उजाला फैलाएंगे।
-आकांक्षा गुप्ता
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X