शक एक जानलेवा बीमारी है
जिसने कई जिंदगी उजाड़ी हैं
शक का रेंगता हुआ कीड़ा
देता है असहनीय पीड़ा
शक विश्वास की नींव हिला देता है
ये अच्छे - अच्छो को रुला देता है
शक परिवार में विस्फोट कराता है
रिश्तों की डोर को उलझाता है
मन में जो आए कर दो उजागर
कभी न ओढ़ो शक की चादर
शक को अपने मन से हटाना है
अगर जीवन में आनंद लाना है |