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सेल्फी

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दुनिया अंधी हुई सेल्फी की दौड़ में,
        
                                                    
                            
इक दूजे से नवीनीकरण की होड़ में।
भले ही घर की हालत पतली हो जाये
सेल्फी के लिए नया फोन आ जाये।।

पढ़ना लिखना तो दूर हुआ अब,
लगता है सेल्फी सफलता दिलायेगी।
खतरनाक जगह पर सेल्फी ही अब
बेदर्दी से निर्मम मौत के दर्शन करायेगी।।

निर्लज्जता फूहड़पन सेल्फी से दर्शाया जाता
अपने चेहरे पर एक मुखोटा लगाया जाता।
क्या सेल्फी जीवन के सुख पहुंचा सकती है
जब घर में बिन बुलाए विपत्ति आ सकती है।।
खतरनाक स्टंट करते युवा क्या दर्शाते हैं
खुद अपने जीवन की रोज होली जलाते हैं।।

क्या ये स्टंट रोजी-रोटी उन्हें दे पायेंगे,
किसी हादसे का शिकार हो सबको रूलायेंगे।
यह सेल्फी नहीं भ्रम जाल बन जाता है
हर रोज कितने जीवन छीन ले जाता है।।

माता पिता के आंखों की रोशनी चली जाती है
एक सेल्फी अक्सर जीवन छीन ले जाती है।
हरा-भरा गुलशन भी जैसे सूख जाता है
जब कोई सेल्फी में अपनी जान गंवाता है।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय
 
5 महीने पहले
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