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क़त'आ

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई और कहानी बन जाती कुछ और फ़साना हो जाता
        
                                                    
                            
हम मिल जाते तो हैं दुनिया का दस्तूर पुराना हो जाता
कुछ आंखें हैं, कुछ चेहरे हैं, कोई ज़ुल्फ़ें हैं, कुछ चालें हैं
तो ये जो नज़रिया है मेरा हो के मयख़ाना हो जाता
2 महीने पहले
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