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क़त'आ

                
                                                         
                            कोई और कहानी बन जाती कुछ और फ़साना हो जाता
                                                                 
                            
हम मिल जाते तो हैं दुनिया का दस्तूर पुराना हो जाता
कुछ आंखें हैं, कुछ चेहरे हैं, कोई ज़ुल्फ़ें हैं, कुछ चालें हैं
तो ये जो नज़रिया है मेरा हो के मयख़ाना हो जाता
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6 घंटे पहले

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