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नकाब का सच

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच्चाई के डर से तू
        
                                                    
                            
कब तक भागता जाएगा?
कब तक तिरछी चाल चलेगा?
एक दिन तो मात खाएगा।

चेहरे पे नकाब लगाकर
कब तक मुंह को छुपाएगा?
दोहरी जिंदगी जीते-जीते
एक दिन तो थक जाएगा।

धोखे की बुनियाद पर
कब तक महल सजाएगा?
चमकेगा सच का सूरज जिस दिन
हर झूठ सामने आएगा।

विश्वासघात का मायाजाल
कब तक तू फैलाएगा?
कपट की यह बिसात भला
कब तक तू जीत पाएगा?

सब कुछ समझ के भी चुप हूँ
जिस दिन यह जान जाएगा,
श्वास तो चलती रहेंगी
पर दम तेरा घुट जाएगा।
-पायल शर्मा 
3 महीने पहले
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