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ऊँच-नीच का भेद मिटाकर, हम सबको सम्मान दिलाए।

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            महू छावनी की धरती पर, एक मसीहा जन्मा था,
        
                                                    
                            
करी पढ़ाई ऐसी थी, वो बादल जैसा गरजा था।

जन्म हुआ था उस कौम में, जिसको सबने दुत्कारा,
होकर इतना विद्वान, फिर सबको उसने ललकारा।

शिक्षक ने भी भेदभाव कर, गेट के बाहर बैठाया था,
आग लगी थी पीने, उसे कोई रोक न पाया था।

लगी झड़ी फिर डिग्रीयों की, और 9 भाषाओं का ज्ञाता था,
इतना ज्ञानी होते भी, फिर भी सम्मान न पाता था।

चपरासी भी फाइल फेंककर, मेज पर उनके देते थे,
कहीं छू न जाए हाथ से हाथ, अशुद्ध उन्हें कर देते थे।

क्यों सारे दूरी बना रहे थे, कौन-सी जाति में जन्मे थे,
दोष नहीं था इसमें उनका, महार जाति में जन्मे थे।

महार जाति में जन्म हुआ , बस इसी बात से नफरत थी,
तुमने ऐसा क्या काम किया, किस वजह तुम्हारी सोहरत थी?

पूना पैक्ट की छिनी लड़ाई, जान अटक गई गांधी की,
उन दलितों का क्या होगा, जिनके गले में लटकी हांडी थी।

पूना पैक्ट में हार मानकर, गांधी को जीवन दान दिया,
हक दिलाकर रहेंगे उनको, मन में उसने ठान लिया।

संविधान सभा में आ न पाए, दरवाजे सब बंद करवाये,
अब लिखता कौन संविधान, फिर मजबूरी ने खुलवाये।

बहस में जीत-जीतकर उसने, सबको ही अधिकार दिलाये,
ऊँच-नीच का भेद मिटाकर, हम सबको सम्मान दिलाए।
 - विकास बाबू
2 घंटे पहले
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