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कुछ खामोशियां बोलती है

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमने चुप रहकर भी बहुत कुछ कह दिया,
        
                                                    
                            
लोग समझे ही नहीं हमने क्या कह दिया।

जिसको अपना समझ के दिल में जगह दी,
वक्त आया तो उसी ने अलविदा कह दिया।

एक रिश्ता था जो सांसों की तरह जिंदा रहा,
नाम पूछा तो जमाने ने उसे क्या कह दिया।

हमने टूटे हुए ख्वाबों को समेटा रात भर,
सुबह आई तो आईना ने भी ख़ता कह दिया।

अब किसी से भी शिकायत की तमन्ना नहीं,
दर्द ने खुद को ही अपना हमनवा कह दिया।

वो मिला भी तो बहुत देर से इस जिंदगी में,
दिल ने फिर भी उसे अपना रास्ता कह दिया।

राकेश कुछ लोग चले जाते हैं चुपचाप मगर,
उनकी यादों ने हमें जीने की वजह कह दिया।।
-- राकेश कुमार तिवारी
11 घंटे पहले
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