आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कुछ खामोशियां बोलती है

                
                                                         
                            हमने चुप रहकर भी बहुत कुछ कह दिया,
                                                                 
                            
लोग समझे ही नहीं हमने क्या कह दिया।

जिसको अपना समझ के दिल में जगह दी,
वक्त आया तो उसी ने अलविदा कह दिया।

एक रिश्ता था जो सांसों की तरह जिंदा रहा,
नाम पूछा तो जमाने ने उसे क्या कह दिया।

हमने टूटे हुए ख्वाबों को समेटा रात भर,
सुबह आई तो आईना ने भी ख़ता कह दिया।

अब किसी से भी शिकायत की तमन्ना नहीं,
दर्द ने खुद को ही अपना हमनवा कह दिया।

वो मिला भी तो बहुत देर से इस जिंदगी में,
दिल ने फिर भी उसे अपना रास्ता कह दिया।

राकेश कुछ लोग चले जाते हैं चुपचाप मगर,
उनकी यादों ने हमें जीने की वजह कह दिया।।
-- राकेश कुमार तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर