कारागार में आधी रात को
जब ज्योति पुंज जली
देवकी वासुदेव के
आशाओं की तपन में
गंग धारा बह चली
दो दो माताओ को
एक लालना मिला
वर्षो का सूना
सपनों का
पालना खिला
बचपन को मानो
बचपन मिला
यौवन को भी
मानो यौवन मिला
प्रेम को अपना
कालजयी प्रियतम मिला
वीरता को नया शौर्य
और पराक्रम मिला
ज्ञान को सर्वभौमिक
गीता ज्ञान मिला
और भक्तों को अपना
भगवान मिला
सच! कृष्ण ना आते
तो ये सब कौन करता !
कौन सबके अरमानों की
झोली को भरता ?
-राजलक्ष्मी राज