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ख़ामोशी से गुजर गया है कौन

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़ामोशी से गुज़र गया है कौन
        
                                                    
                            
दिल के अंदर उतर गया है कौन।

रफ़्ता-रफ़्ता जो बदलता ही गया
वक़्त का वो नगर गया है कौन।

मुस्कुरा कर जो सह गया सब कुछ
आँसुओं से निखर गया है कौन।

जो अकेला था भीड़ में कल तक
आज ख़ुद से ही डर गया है कौन।

साए ढलते ही शाम ढलने लगी
रोशनी में बिछड़ गया है कौन।।।।
- राकेश कुमार तिवारी 
2 घंटे पहले
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