संभालें जीवन का सुख दुख कैसे ?
आओ हम तुम जाने ,सच ऐसे।
मिले न जीवन में सुख अपार ।
न ही कोई चाहे दुख का संसार।
करूँ मैं विनती जोड़ के हाथ।
प्रभु पीड़ा में तुम देना साथ !
दुख का तुम करो तुरत निदान ।
और सुख में तुम लो संज्ञान ।
कभी किसी को मैं न सताऊं।
झूठा सुख मैं कतई न चाहूं ।
सब कुछ हो सम्यक कुछ ऐसा
सुख दुख में संयम के जैसा !
सब सुखी तो दुख फिर कैसा ?
चिर सुख चिर दुख कभी न होता
जीवन तो है ज्वार और भाटा
सहज सँवारें लाभ और घाटा
जीने की बस यह तैयारी
सुख दुख आते बारी बारी !!
-कुमकुम माथुर