विज्ञापन

जब प्रेम शिव से है - शिवत्व भाग

User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब प्रेम शिव से है
        
                                                    
                            
तो वैराग्य क्या संसार क्या
बहिष्कार क्या स्वीकार क्या
संघर्ष क्या आराम क्या
चिता क्या चिंतन क्या
रुदन क्या हास्य क्या
जो रम के ना मिल पाया
उसका विलाप क्या
जब सब शिव से जुड़ गया
तो पश्चाताप क्या व्यवहार क्या

तुममें होकर जाना जब जग को
जग में लगा अब कुछ नहीं है
सब तेरे चक्कर काट रहे
और आप सबके चक्र काट रहे
लोग पूजते मंदिर और शिवालों में
और आप घर में माता - पिता के चरणों में विराज रहे

अब लगता है मन छूट जाये सबसे
अगर आप स्वीकार हो
मन तृष्णा की मिट जाएं
चाहे अंत आपके हाथ हो
क्योंकि
अंत का विकल्प हो
या आरंभ का विचार हो
जगत में विचरते हम
जिनका अंतिम संस्कार आप हो

तो अगर आप साथ हो
तो परम क्या विकार क्या
जब अंत और आदि
तो सब जीवन और वरदान क्या
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Deepti Tripathi

119 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile