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पथ-प्रदर्शक बनकर गुरु जीवन भर शिष्य को समझाता है

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            विषय हमारे आदर्श हमारे शिक्षक
        
                                                    
                            

गुरु ने जो हमको ज्ञान दिया वही ज्ञान फैला रहा प्रकाश,
रस छंद अलंकारों से है आज अलंकृत सकल आकाश।
आज अलंकृत आकाश सकल गगन आज हर्षाता है,
इस ज्ञान विज्ञान के कारण ही मनुज श्रेष्ठ कहलाता है।।

मनुज पशु में अंतर बस इतना ही तो यह कहलाता है,
अपने विज्ञान और तकनीक से ही पशु से श्रेष्ठ बन जाता है।
आहार विहार सुख दुःख का अनुभव तो सब ही करते हैं,
गुरु कृपा के कारण ही कुछ सितारे बनकर चमकते हैं।।

यदि न देता गुरु हमें तो हम सत्य असत्य में अंतर कर पाते?
अशिक्षा के कलुषित अंधकार में हम स्वयं को कभी पहचान पाते।
जितना ऊंचा आज विकास हुआ क्या बिन गुरुओं के हो पाता?
इस तकनीकी खोजों का ज्ञान कभी बिन गुरुओं के मिल पाता?

यदि सम्मान गुरु का नहीं कर सकते तो फिर अपमान क्यों?
गिरता है जब शिक्षा का स्तर तो छोटा होता हर आसमान क्यों?
इसी बुद्धि विवेक का ज्ञान गुरु ही अक्सर शिष्य को देता है,
जिसके कारण ही कोई अच्छा शिष्य गुरु का नाम रोशन करता है।।

पथ-प्रदर्शक बनकर गुरु जीवन भर शिष्य को समझाता है,
ये कठिनाईयां भी एक शिक्षक हैं जहां सोना कंचन बनता है।
प्रकृति ने शिक्षक बनकर ही हमको समय समय पर संभाला है,
हर आपदा को शिक्षा बनाकर जीवन को कष्टों से निकाला है।।

 
एक महीने पहले
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