चलो बाजार की ओर चलें हम भी करें घोटाला
क्यों गया भैंस पालेंगे जब घी है चर्बी वाला।
चावल हो या सब्जी, सब जहर से सीचेंगे
बनिया बन सस्ते में खरीद कई गुने में बेचेंगे
खैर ये काम बड़ा मुश्किल है हमसे ना हो पाएगा
जिसने हमको दूध पिलाया उसका रक्त कौन बहाएगा
जन्मदात्री माँ की गर्दन पर भला खंजर कौन चलाएगा
पंचतत्व में जहर घोल कितने हैं जो जी लेंगे
प्रकृति की हर चीज हैं लेते क्या अभिशाप नहीं लेंगे।
अपनी ही जहरीली सोच के नागपाश में कसेंगे
जो सांप है दूसरे के लिए पाले वही उनको डसेंगे।
जो छोटी छोटी कलियों को तोड़, नहीं खिलने देंगे
उनके ही गमले वसंत आने पर सूने रहेंगे।
-राजलक्ष्मी राज