वक़्त मुसलसल चलता है
कितने फ़लक बदलता है
मैं इस घर में रहता हूं
ये हर वक़्त जो जलता है
किसी की प्यास बुझानी थी
पत्थर कोई पिघलता है
आंसू - आंसू कोई ग़म
हंसते हुए निकलता है
वो सूरज फिर उगा नहीं
ये सूरज भी ढलता है
जाने किस उम्मीद में दिल
धड़कन से न संभलता है
मेरी क़लम रुक जाती है
घर से 'रंग' निकलता है