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पर अपने कम ही मिलते हैं अब

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फुर्सत के क्षण
        
                                                    
                            
कम ही मिलते हैं अब
सुकून के पल
कम ही मिलते हैं अब

खुशियां कम
और ज्यादा
गम ही मिलते हैं अब

शोर - शराबे और झंझटें
हरदम मिलते हैं अब
भीड़ है बहुत ज्यादा
पर अपने कम ही मिलते हैं अब

सब कुछ है पास हमारे
पर हँसने के बहाने
कम ही मिलते हैं अब
 
एक महीने पहले
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