फुर्सत के क्षण
कम ही मिलते हैं अब
सुकून के पल
कम ही मिलते हैं अब
खुशियां कम
और ज्यादा
गम ही मिलते हैं अब
शोर - शराबे और झंझटें
हरदम मिलते हैं अब
भीड़ है बहुत ज्यादा
पर अपने कम ही मिलते हैं अब
सब कुछ है पास हमारे
पर हँसने के बहाने
कम ही मिलते हैं अब
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