कुछ पाने की चाहत दिल में जगाए रखती हूं,
मैं अपने आंखों में एक सपना सजा रखती हूं।
कल जो थकी थी, उसे रात के अंधेरे में छोड़ने का साहस रखती हूं,
उठकर नई सुबह आगमन करती हु।
कुछ पाने की चाहत दिल में सजाए रखती हूं।
खुद को हौसले की उड़ान से सजाए रखती हूं,
पुराने रास्तों से गुजरा मुझे मंजूर नहीं,
अपने लिए नए रास्ते बनाए रखती हूं।
चाहत बड़ी है तो कोशिश भी बड़ी होगी,
यह सब को बताए रखती हूं।
हौसले की नई उड़ान बनाए रखती हूं,
कहते थे जो कल तक नहीं कर पाओगी,
उनके चेहरे को नैनों में बसाए रखती हूं,
खुद के लिए अकेली ही काफी हूं,
यह काफिरों को बताएं रखती हूं।
खुद के लिए नई राह बनाए रखती हूं,
कुछ पाने की चाहत दिल में जगये रखती हूं।
-रश्मि..