विज्ञापन

बारिश की बूंदें और यादें

User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फिर आज गालों पर बूदें गिरी हैं
        
                                                    
                            
संग अपने वो परानी यादें लाई हैं।
आसमाँ से गिरा है पानी ऐसे
जैसे सदियों की छौपी बातें याद आई है।

वो कागज की नाव और भोला बचपन
मिट्टी की खुशबू से महकता था आंगन
दूर आसमान में दिखता वो इंद्रधनुष
याद आ गया दृश्य वो मनभावन।

भीगी सी गलियां, भीगा सा शहर
उनकी यादों से अब भीगा है मन
हर बूंद में छुपा है,बीता हआ कल
जब बूँद आकर छूती है मेरा तन।

बूंदों से बिखरते हैं बीते हुए लम्हे
आँखों में छलक जाते हैं सारे ख्वाब
बरसात तो बस एक बहाना है
जब याद आती है जीवन की किताब।

पायल शर्मा (जयपुर)
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile