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मोहब्बत छोड़ोगे कैसे बेहाल कर मुझे।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसको नही गुमान अपने प्रेम पर।
        
                                                    
                            
फिर भी परेशानी होती इंतजार पर।।

तकलीफ़ हो रही थूक को गटकने में।
आँखें मूँद लेती गहरी याद में डूबकर।।

रोशनी के साथ भीनी-भीनी याद आई।
नींद नही आने दी आँखों में बसा कर।।

मोहब्बत छोड़ोगे कैसे बेहाल कर मुझे।
खैरियत पूछने ही आते अचंभित कर।।

निःस्वार्थ समर्पण के बाद भी उलझन।
तरकीब निकाल 'उपदेश' जुगाड़ कर।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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