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वक्त पर आधारित कहानी मेरी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक्त पर आधारित कहानी मेरी।
        
                                                    
                            
मिली वह जानी पहचानी मेरी।।

चाहतों में पहली चाहत पूरी हुई।
वही बन गई दिल की रानी मेरी।।

जिंदगी उस घड़ी की शुक्रगुज़ार।
जब रानी भी हो गई दीवानी मेरी।।

वक्त बदला मगर जज़्बाती ठहरी।
खोई नही साँसों की रवानी मेरी।।

मुकाम अपनी जगह पर 'उपदेश'।
उम्र का तकादा कहे जवानी मेरी।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक दिन पहले
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