उम्मीद छोड़ी नही आजतक उनसे मैंने।
और आईना भी देखना नही छोड़ा मैंने।।
वक्त का इशारा समझने में देर कर दी।
चुप रहने के बाद साथ नही छोड़ा मैंने।।
विश्वास मेरा बाल-बांका कर नही सका।
शिक्षित हूँ अच्छाईयों को नही छोड़ा मैंने।।
सपनों में जो हुआ उससे लोगों का क्या।
बदनामी के बाद भरोसा नही छोड़ा मैंने।।
जिंदगी में हर रोज इम्तिहान कुबूल मुझे।
बेहद प्रेम समाया 'उपदेश' नही छोड़ा मैंने।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'