विज्ञापन

व्यवहार उनसे तरल रहा

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रश्न बेशक कठिन पर उत्तर मेरा सरल रहा।
        
                                                    
                            
व्यवहार ना जाने क्यों उनसे मेरा तरल रहा।।

मन में कुछ मगर जुबान पर रखे कुछ और।
देख रही उनका नजरिया पल-पल बदल रहा।।

लिव इन रिलेशनशिप रहने की मज़बूरी कैसी।
उनके तर्क-वितर्क में कहीं न कहीं छल रहा।।

शिक्षित और विकसित सोच का परिणाम यही।
जिम्मेदारी से बचते मर्द स्त्री का पैर फ़िसल रहा।।

अकेलापन दूर करने के विकल्प और 'उपदेश'।
अपना होकर इंसान अपनों से नही संभल रहा।।

मर न जाएं रिश्ते उम्र के साथ नसीहत मिलती।
तरसेगे अपना कहने को सच्चा ज्ञान प्रबल रहा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile