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इससे सुख-दुख भाव अभाव का दर्द आम हुआ।।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उम्र भर निभाओगे ऐसा मुझ को भ्रम हुआ।
        
                                                    
                            
तुम आईना रहे आईना ही रहोगे ये आम हुआ।।

चेहरे पर कुछ दिल में और कुछ में फ़िक्र रही।
संग उम्मीद से शुरू गैरहाजिर पर मातम हुआ।।

खुद को जानने का प्रयास कौन करे इस उम्र में।
इससे सुख-दुख भाव अभाव का दर्द आम हुआ।।

वो आराम से देखे गये जो पत्थर के बने रहे सदा।
मुसीबत एहसास वालों को यहाँ सरेआम हुआ।।

हम किसी को बद्दुआ नही देना चाहतें 'उपदेश'।
जिसने मुझे जो दिया उसका दोगुना इनाम हुआ।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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