विज्ञापन

सूने से मन्दिर में अनुष्ठान की धूनी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सूने से मन्दिर में अनुष्ठान की धूनी।
        
                                                    
                            
अवसाद की राख है चन्दन सी धनी।।

आँखों के चारो ओर ज़ज्बात जमे।
आशा की किरण छनकर हुई बौनी।।

तुम मेरे जीवन के अद्भुत अलंकार।
तुमसे खिल उठता तुम्हीं से मैं बनी।।

तेरे अस्तित्व की लौ तड़पती कब से।
दुखों के महाभारत में विवाद से सनी।।

घिर गई बंदिशों के साये में 'उपदेश'।
जमीन से आसमान तक तन्हा जनी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
6 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

SATYENDRA KUMAR

133 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12655 कविताएं

View Profile

Pankaj Sharma

1246 कविताएं

View Profile