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रिश्ते का दम घुट रहा

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कह दो, हर रिश्ते का दम घुट रहा।
        
                                                    
                            
दौड़ते खून में, सच्चा प्यार मिट रहा।।

ज्यादातर को एकाकी जीवन पसन्द।
संयुक्त परिवार का चलन मिट रहा।।

ऑर्डर दो मिनटों में हाजिर हो जाता।
लो घर के खाने का स्वाद मिट रहा।।

ले डूबेगा मॉल खुदरा कारोबार को।
ऑनलाइन से छोटा व्यापार मिट रहा।।

खून के रिश्तों में कुरुक्षेत्र सा चलता।
चालाकी से 'उपदेश' संसार मिट रहा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
23 घंटे पहले
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