विज्ञापन

एक एहसास के लिए उसे धन्यवाद।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रेम का होना अपने बस में कहाँ।
        
                                                    
                            
उसके बिना सूना सूना लगता जहाँ।।

उसके होने की खुशी भीतर खिली।
उसे खिलाए रखना मेरे बस में कहाँ।।

हर प्रेम को मुकाम मिले सम्भव नही।
उसे पाने की जिद्द मत करना यहाँ।।

एक एहसास के लिए उसे धन्यवाद।
भीतर प्रेम 'उपदेश' खुशबू जाने जहाँ।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
7 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Bihari BR01

2 कविताएं

View Profile