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मिट रहे निशान फिर होगा क्या

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक्त के साथ मिट रहे निशान फिर होगा क्या।
        
                                                    
                            
दर्द लिखते रहने का हिसाब मुझसे होगा क्या।।

बिना सुने ही समझता खामोशी की जुबान वो।
फिर भी सुनाना चाहता प्रेमी उससे होगा क्या।।

बीते हुए लम्हों को जगाने की कोशिश नाकाम।
दूर जा रहा है फितरती इंसान इससे होगा क्या।।

हर लाइनों में छुपा राज 'उपदेश' जज्बातो का।
मुकद्दर की अदावत बेईमान किससे होगा क्या।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
5 घंटे पहले
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