विज्ञापन

मोहब्बतें खामोशी में जीती

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ मोहब्बतें खामोशी में जीती
        
                                                    
                            
कुछ दस्तक के इंतजार में जीती

राहे कितनी भी अलग हो लेकिन
गुजर-बसर करके यादो में जीती

हकीकत नज़र आती सम्हाल लेती
धड़कते दिल के संग प्यार में जीती

आँखें भीगती चर्चे आम होने पर
जिन्दगी 'उपदेश' फिर भी जीती
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all