आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मोहब्बतें खामोशी में जीती

                
                                                         
                            कुछ मोहब्बतें खामोशी में जीती
                                                                 
                            
कुछ दस्तक के इंतजार में जीती

राहे कितनी भी अलग हो लेकिन
गुजर-बसर करके यादो में जीती

हकीकत नज़र आती सम्हाल लेती
धड़कते दिल के संग प्यार में जीती

आँखें भीगती चर्चे आम होने पर
जिन्दगी 'उपदेश' फिर भी जीती
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर