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मेरे ख्वाब

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रेयसी करीब बैठकर जरा भी छूती नही मुझे।
        
                                                    
                            
बतियाती इधर-उधर देखकर देखती नही मुझे।।

मेरे ख्वाब कहीं हकीकत न हो जाए उस पल।
अपने यहाँ के तौर-तरीकों को बताती नही मुझे।।

झूठी ही सही मगर वाह-वाही चाहती पल पल।
बहाने बनाकर चली गई गले लगाती नही मुझे।।

मुझे खरी उम्मीद वह भी जरूर मेरा साथ देगी।
हर वक्त पीछे खींचती आगे बढ़ाती नही मुझे।।

फिर भी उसके हौसले बुलन्दियों पर 'उपदेश'।
यार वाकिफ नही मिजाज़ से सताती नही मुझे।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
5 घंटे पहले
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